प्रेम और त्याग की शिक्षा देता है श्रीराम का वनवास

धार्मिक

अमृत है हरि नाम जगत में

सेवा भारती छावनी द्वारा प्रकाश फार्म हाउस सेवला पर चल रही श्रीराम कथा के सप्तम दिवस पर भक्तों की अपार संख्या रही

आगरा। श्रीराम ने अपने त्याग एवं प्रेम से ही समाज में उच्च आदर्श स्थापित किया। श्रीराम का वनवास मानव समाज में प्रेम और त्याग की शिक्षा देता है। पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी मानस के सारणगति के आचार्य श्री भानुदेव आचार्य ने सेवला प्रकाश फार्म हाउस में सेवा भारती छावनी द्वारा आयोजित कथा में सातवें दिन राजा जनक पुत्री सीता जी की विदाई का भक्तों को संगीतमय व भक्तिमय रसपान कराया।

 महल में जिस राम का जन्म हुआ था, उन राम जी की जननी कौशल्या जी थीं। वनवासी राम को जन्म देने वाली माता केकई थी। आचार्य जी बताते है, राम वनवास से पूरा राज्य दुखी हो जाता है। समस्त प्रजा विलाप करती है। प्रभु राम का प्रेम और बलिदान दर्शाती है। श्रीराम को राज्य और सिंहासन सब त्याग पिता की आज्ञा और माँ कैकेई के लिये कोई ग्लानी नहीं थी। वह पिता के वचन के लिए सीता माँ और भ्राता लक्षमण के साथ वनवास चल दिये। हरि नाम नही तोह जीना क्या, अमृत है हरि नाम जगत में… भजन पर भक्तों ने भी अपने स्वर मिलाए और नृत्य किया। वनवास यात्र के दौरान प्रभु का चित्रकूट की दिव्य भूमि में प्रवेश व केवट संवाद भक्तिमय दर्शन कराया। इस अवसर पर मुख्य यजमान डॉ. आकाश अग्रवाल, ऋषि गुप्ता, सतेन्द्र पराशर, ठा. राजवीर सिंह, संजय सिंघल, पीके मिश्रा,  महेश त्यागी, दिनेश अग्रवाल(एड),  विजय सिंह, शुभम सिंघल व समस्त सेवा भारती छावनी महानगर सेवला के सदस्य मौजूद रहे।

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