सफलता का सूत्र है सकारात्मक नजरिया

एजुकेशन

आगरा।डॉलीश्ज पब्लिक इंटर कॉलेज में स्टूडेंट्स के लिए सकारात्मक नजरिया विकसित करने पर एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया जिसमे विद्यार्थियों को बताया गया की जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं! ट्रेनर निर्मेश राघव ने बताया की विद्यार्थी अपने फोकस को बदले और नकारात्मक चीजों को छोड़कर सकारात्मक चीजों को ग्रहण करे, हाल ही में प्रदर्शित हुई क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की बायोग्राफी मूवी में भी दिखाया गया है की धोनी के दोस्त संतोष को हेलीकाप्टर शॉट खेलना आना संतोष की सकारात्मक बात थी साथ ही संतोष में शराब पीने की नकारात्मक आदत भी थी लेकिन धोनी ने संतोष से हेलिकॉप्टर शॉट सीख कर संतोष की सकारात्मक चीज को ग्रहण किया और नकारात्मक चीज को ग्रहण नहीं किया इसी तरह से हर स्टूडेंट को चाहिए की वह अपने रास्ते में आने वाली सकारत्मक चीजों को अपनाये और नकारात्मक चीजों से दूर रहे! जिस विद्यार्थी में नकारात्मक नजरिये की धारणा वन जाती है जैसे की वह बीमार है तो वह निश्चय ही बीमार हो जायेगा ! ट्रेनर ने बच्चो को एक कहानी के माध्यम से बताया की एक दिन एक चील का अंडा किसी तरह एक जंगली मुर्गी के घोसले में चला गया और बाकी अंडों के साथ मिल गया द्य समय आने पर अंडा फूटा चील का बच्चा अंडे से निकलने के बाद यह सोचता हुआ बड़ा हुआ कि वह मुर्गी है द्य वह उन्हीं कामों को करता, जिन्हें मुर्गी करती थी द्य वह जमीन खोदकर अनाज के दाने चुगता, और मुर्गी की तरह ही कुड़कुड़ाता। वह कुछ फीट से अधिक उड़ान नहीं भरता था, क्योंकि मुर्गी भी ऐसा ही करती थी द्य एक दिन उसने आकाश में एक चील को बड़ी शान से उड़ते हुए देखा द्य उसने मुर्गी से पूछा, ष्उस सुंदर चिड़िया का नाम क्या है?ष् मुर्गी ने जवाब दिया, ष्वह चील है द्य वह एक शानदार चिड़िया है, लेकिन तुम उसकी तरह उड़ान नहीं भर सकते, क्योंकि तुम तो मुर्गी हो द्यष् चील के बच्चे ने बिना सोचे-विचारे मुर्गी की बात को मान लिया द्य वह मुर्गी की जिंदगी जीता हुआ अंत में मर गया द्य सकारात्मक सोच की क्षमता ना होने के कारण वह अपनी विरासत को खो बैठा द्य उसका कितना बड़ा नुकसान हुआ द्य जीतने के लिए पैदा हुआ था, पर वह दिमागी रुप से हार के लिए तैयार हुआ था द्य इस कहनी का सन्देश साफ है अधिकतर लोगों के लिए यही बात सच है द्य जैसा कि ओलिवर वेंडल होम्स ने कहा है कि हमारी जिंदगी का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि ज्यादातर लोग मन में कुछ करने की इच्छा लिए ही कब्र में चले जाते हैंद्य हम अपनी ही सोच की कमी की वजह से बेहतरीन हासिल नहीं कर पाते द्य
अगर हम चील की तरह आकाश की बुलंदियों को छूना चाहते हैं तो हमको चील के तौर तरीकों को सीखना होगा द्य अगर हम खुद ही कामयाब लोगों के साथ जुड़ेंगे तो हम भी कामयाब हो जाएंगे द्य अगर हम चिंतको के साथ जुड़ेगे तो चिंतित बन जाएंगे, देने वालों के साथ रहेंगे तो देने वाले बन जाएंगे द्य अगर हम नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहेंगे तो वैसे ही बन जाएंगे द्य हम जब खुद को ऐसे लोगों से उलझने से बचा लेते हैं तो हम जीत जाते हैं द्य मार्शल आर्ट में सिखाया जाता है कि जब कोई हम पर हमला करें तो उसे रोकने की वजाए अपनी जगह से हट जाए क्योंकी इसे रोकने के लिए ऊर्जा की जरूरत होगी तो इसे बचाकर इसका इस्तेमाल और बेहतर कामों के लिए क्यों न किया जाए !
केस लर्निंग एंड डेवलपमेंट की डायरेक्टर उषा सिंह ने सभी स्टूडेंट्स से अपील की वे भगवान द्वारा दी गयी अपनी जन्म जात प्रतिभा व् हुनर को पहचाने और इसी दिशा में अपना बेहतरीन करियर बनाये ! डी एम् आई टी तकनीकी से विद्यार्थी अपनी जन्म जात प्रतिभा, टैलेंट, अपने स्ट्रेंथ और वीकनेस पता करने के साथ ही अपने लिए कौन सा करियर विक्लप अच्छा रहेगा पता कर सकते है ! इस अवसर पर संस्था के चेयरमैन वी.के. मित्तल, प्रधानाचार्य श्रीमती सुनैना नाथ, कोआर्डिनेटरश्रीमती नुपूर व् समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे !

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